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चेतेश्वर पुजारा को दिया नॉट आउट, अंपायर से भिड़े ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन

सिडनी सिडनी टेस्ट के तीसरे दिन शनिवार को ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन अंपायर के एक फैसले पर आपा खो बैठे। भारत के खिलाफ मैच के दौरान जब अंपायर ने चेतेश्वर पुजारा को नॉट आउट दिया तो पेन उस फैसले से असहमत नजर आए। पारी के 56वें ओवर में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने नाथन लायन की गेंद पर शॉर्ट लेग पर कैच की अपील की। लायन का मानना था कि गेंद पुजारा के बल्ले से लगकर फील्डर के पास गई है। मैदान पर मौजूद अंपायर पॉल विल्सन ने इसे नॉट आउट करार दिया। इस पर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पने ने इस पर DRS लेने का फैसला किया। रीप्ले में देखने के बाद भी कोई किनारा नजर नहीं आया और हॉट स्पॉट से देखने पर भी बल्ले का किनारा नहीं दिखा। फील्डर के खड़े होने की वजह से कैमरे पर साफ नजर भी नहीं आ रहा था। तीसरे अंपायर ब्रूस ऑक्सनफर्ड ने स्नीकोमीटर पर देखने के बाद कहा कि गेंद जब बल्ले के पास से गुजर रही है तब 'फ्लैट लाइन' है। यानी उन्हें बल्ले का किनारा लगने का कोई स्पष्ट सबूत नजर नहीं आ रहा है। इसी वजह से मैदानी अंपायर के फैसले को बदलने का कोई कारण नजर नहीं आता। इसके बाद पेन काफी नाराज हो गए। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, 'कहां हैं हॉट स्पॉट? दूसरी ओर से हॉट स्पॉट।' वह तीसरे अंपायर को सलाह दे रहे थे कि उन्होंने लेग साइड के कैमरे को देखने में ज्यादा वक्त नहीं बिताया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक क्लिप पोस्ट किया है जिसमें गेंद जब पुजारा के बल्ले के करीब से गुजर रही है तो उसमें हल्का सा स्पाइक नजर आ रहा है। हालांकि तीसरे अंपायर को इस बात के साक्ष्य नहीं मिले कि यह गेंद के बल्ले से लगने की वजह से है। पेन इसी बात को लेकर नाराज थे। इस दौरान उनकी भाषा भी अभद्र थी। वह अंपायर के फैसले में निरंतरता की बात कर रहे थे। असल में निरंतरता से उनका अर्थ इस बात को लेकर था कि मेलबर्न टेस्ट में इतने ही स्पाइक से उन्हें आउट दे दिया गया था। पेन चाहते थे कि पुजारा को इसी के आधार पर आउट दिया जाना चाहिए था। मेलबर्न में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में पेन को ऋषभ पंत के कैच आउट दिया गया था। हॉट स्पॉट पर कुछ नजर नहीं आया था लेकिन स्नीको में हल्का सा स्पाइक नजर आया था। पेन ने उस समय कहा, 'मेरी परेशानी तकनीक से नहीं है। मैं उस चलन की बात है जो पहली पारी में पुजारा के साथ तय किया गया। मुझे लगता है कि फैसला बहुत जल्दी ले लिया गया। विलसन ने सभी सबूत देखने के लिए पर्याप्त रीप्ले नहीं देखे।' इसके बाद मैदानी अंपायर ने कहा कि तीसरे अंपायर ने अपना फैसला कर लिया है और इसके बाद पेन को कुछ और नहीं कहना चाहिए। अपनी इस हरकत के लिए पेन पर जुर्माना भी लग सकता है। उनका यह कॉमेंट आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ जाता है। सेक्शन 2.3 और 2.8 के अनुसार अंपायर के फैसले से इस तरह असहमति जताना अपराध माना जाता है।


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