DRS नहीं इस्तेमाल करने पर सचिन तेंडुलकर और महेंद्र सिंह धोनी से नाराज थे शशि थरूर
नई दिल्ली भारतीय राजनेता (Shashi Tharoor) ने डिसिजन रीव्यू सिस्टम () को क्रिकेट के लिए बेहद अहम हिस्सा बताया है। उन्होंने इसके खेल पर असर पर चर्चा करते हुए कहा कि डीआरएस (DRS) क्रिकेट के लिए सबसे प्रयोगों में से एक है। कांग्रेस नेता और सांसद ने कहा कि वह (Sachin Tendulkar) और महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) से तब बहुत निराश हुए थे जब इन दोनों ने DRS लागू करने के प्रति रूचि नहीं दिखाई थी। थरूर (Shashi Tharoor) ने स्पोर्टसकीड़ा के फेसबुक पेज पर कहा कि वह शुरू से ही DRS के फैन हैं और भारत को इसे इस्तेमाल करने पर शुरू में ही राजी हो जाना चाहिए था। थरूर ने कहा, 'मैं तकनीक का बहुत बड़ा फैन हूं। मैं शुरू से ही DRS की वकालत करता हूं। और जब धोनी और तेंडुलकर ने इसे मानने से इनकार किया तो मैं काफी नाराज था। मैं क्रिकेट देखता हूं हर बार मैंने देखा है कि खराब अंपायरिंग फैसलों का हमें कितना नुकसान हुआ है। मुझे समझ नहीं आया था कि हम DRS से इतना परहेज क्यों कर रहे थे।' थरूर ने कहा, 'मैं अब DRS के बिना कभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं देखूंगा।' उन्होंने कहा कि धोनी ने DRS का सही इस्तेमाल कर अपने लिए एक अलग नाम बनाया। थरूर का इशारा सोशल मीडिया और लोगों के बीच प्रचलित Dhoni Review System नाम को लेकर था। थरूर ने जोर देकर कहा कि तकनीक कितनी गलतियों को रोकती है इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भविष्य में कभी DRS के बिना नहीं खेला जाएगा। उन्होंने कहा, 'DRS कितनी गलतियों को रोकता है और यह टीवी पर देखने वाले के लिए एक अलग स्तर का रोमांच पैदा करता है। और जहां तक मुझे लगता है कि यह एक अलग मसाले की तरह काम करता है।' भारत DRS को इस्तेमाल करने वाले शुरुआती देशों में था। श्रीलंका के खिलाफ 2008 में इसका इस्तेमाल किया गया था। लेकिन भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इसके हक में नजर नहीं आए। वह इस तकनीक में कई खामियां मानते थे। पिछले दशक में जाकर ही भारतीय टीम ने इसे पूरी तरह अपनाना शुरू किया।
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