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लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे सचिन के सबसे बड़े फैन सुधीर

संजीव कुमार, नई दिल्ली अगर देश और दुनिया में हालात सामान्य होते तो क्रिकेट स्टेडियम्स की गैलरीज में दिखने वाले मशहूर चेहरों में से एक मुंबई से चेन्नै के सफर में होते। वहां वह 24 अप्रैल को आईपीएल की अपनी फेवरिट टीम मुंबई इंडियंस के मेजबान चैन्नै सुपरकिंग्स के खिलाफ मैच देखते और फिर देर रात अपने 'भगवान' सचिन तेंडुलकर का 47वां जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहे होते। मगर, अफसोस यह सब अब सपना सरीखा हो गया है। कोरोना के कहर की वजह से सुधीर इन दिनों दिल्ली में एक दोस्त के साथ एक फ्लैट में कैद हैं और उनका क्रिकेट कारवां थम गया है। पिछले 19 साल से क्रिकेट मैदानों पर खास अंदाज में तिरंगा लहराते, शंख बजाते टीम इंडिया को चियर करते फैन नंबर-1 सुधीर बताते हैं, '2001 से मेरी क्रिकेट यात्रा चल रही है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं किसी एक जगह एक महीने तक रहा हूं। मगर वक्त की मांग यही है कि घर में रहा जाए।' क्या सुधीर मैदान के ऐक्शन को मिस नहीं करते? 'बिल्कुल करता हूं और कभी-कभी बहुत बेचैनी होती है', सुधीर बताते हैं। ऐसे में वह शंख बजाकर अपना शौक पूरा कर लेते हैं। उन्होंने बताया, 'दो दिन तो ऐसा हुआ कि मैं बालकनी पर जाकर लगातार 15 मिनट तक शंख बजाता रहा।' साइकिल यात्रा की कोशिश असफल सुधीर बताते हैं कि वह भारत-साउथ अफ्रीका सीरीज के लिए धर्मशाला गए थे। वहां का मैच रद्द होने के बाद वह दिल्ली आए और अपने एक मित्र अरुण त्रिपाठी के घर पटेल नगर रुक गए। उसके बाद सीरीज रद्द हो गई तो उन्होंने 23 मार्च का घर वापसी का टिकट कटाया। मगर लॉकडाउन और ट्रेन रद्द होने की वजह से वह दिल्ली में ही फंस गए। फिर उन्होंने योजना बनाई कि साइकिल पर अपने गृह नगर मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो जाएं। इस यात्रा के दौरान वह लोगों को कोरोना से बचाव का संदेश भी देंगे। इसके लिए उन्हें कुछ जानने वालों ने साइकिल देने का वादा भी कर दिया। सुधीर ने कुछ परिचित पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा। पहले तो उन्हें आश्वासन मिला लेकिन बाद में सबने सख्ती का हवाला देते हुए मना कर दिया। सुधीर कहते हैं, 'भला हो मित्र अरुण का जो मुझे एक ठिकाना मिल गया। हम दोनों क्रिकेट के जरिए 11 साल पहले मिले और तब से मुझे उनका सपोर्ट मिलता रहा है।' ड्राइविंग सीखकर जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाएंगे 'सुधीर को अहसास है कि अगले कुछ महीनों तक क्रिकेट नहीं होने वाला। ऐसे में उनका जीवन नीरस हो जाएगा। वह खाली नहीं बैठ सकते। लिहाजा उन्होंने एक लक्ष्य तय किया है। वह ड्राइविंग सीखकर अपनी आजीविका चलाएंगे। सुधीर कहते हैं,'मैं कोशिश करूं तो मुझे नौकरी मिल सकती है लेकिन मैं कहीं बंधना नहीं चाहता। जैसे ही क्रिकेट शुरू होगा मैं फिर से यात्रा पर निकल पड़ूंगा। इसलिए ड्राइविंग सीखकर कुछ पैसे कमाऊंगा और अपना मन लगाऊंगा।'


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