Recent Posts

गांधीजी ने क्यों किया था क्रिकेट टूर्नमेंट का विरोध!

बोरिया मजूमदार महात्मा गांधी और क्रिकेट यह सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है। लोगों को खेलों के प्रति महात्मा गांधी के उत्साह के बारे में जानकारी कम ही है। लेकिन आजादी की लड़ाई लड़ रहे महात्मा गांधी ने उस वक्त बॉम्बे के मशहूर क्रिकेट टूर्नमेंट 'बॉम्बे पेन्टैंगुलर (पंककोणीय) टूर्नमेंट का विरोध किया था। औपनिवेशिक भारत में यह टूर्नमेंट क्रिकेट के मुख्य टूर्नमेंट्स में से एक था। इस टूर्नमेंट में समुदायों के आधार पर टीमें बंटी हुई थीं, जिनमें हिंदू, मुस्लिम, पारसी, यूरोपीय और अन्य इन पांच संप्रदायों के आधार पर टीमें हिस्सा लेती थीं।' कौशिक बंदोपाध्याय ने अपनी पुस्तक 'महात्मा ऑन द पिच' में बेहतरीन अंदाज में गांधी जी के खेल प्रेम को दर्शाया है। इस पुस्तक में खेल प्रेमी गांधी की झलक नजर आती है, जिन्होंने थोड़ा बहुत ही खेल खासतौर से क्रिकेट खेला। 1965 में प्रकाशित गांधीजी पर प्यारेलाल द्वारा लिखी बायोग्रफी में उनके बचपन के कुछ खास अंशों का उल्लेख मिलता है। इस पुस्तक के मुताबिक, 'युवा गांधीजी एक खिलाड़ी से ज्यादा सम्मानित अंपायरों में गिने जाते थे।' इस किताब में एक क्रिकेट मैच का उदाहरण दिया गया है, जिसके मुताबिक, एक चांदनी रात में कुछ हिंदू और मुस्लिम लड़के शहर के अलग-अलग हिस्सों से यहां खेलने के लिए इकट्ठा हुए थे। गांधी जी इस मैच में खिलाड़ियों में तो शुमार नहीं थे लेकिन मैच में अधिकारिक अंपायरिंग का जिम्मा गांधीजी ने ही संभाला था। जो लोग इस मैच से जुडे़ थे उनके मुताबिक इस मैच में खेल के नियमों का काफी कड़ाई से पालन किया गया था। अगर गांधीजी के क्रिकेट खेलने की बात करें, तो अपनी आत्मकथा में उन्होंने बताया है कि अपने स्कूल के दिनों में भी उन्होंने न तो क्रिकेट और न ही किसी अन्य खेल में तब तक हिस्सा नहीं लिया था, जब तक उनके स्कूल के हेडमास्टर ने खेलों को सभी के लिए अनिवार्य नहीं कर दिया था। जब स्कूल के हेडमास्टर ने छात्रों के लिए खेल अनिवार्य कर दिए तो उन्हें मजबूरन क्रिकेट और ऐथलेटिक्स जैसे खेलों में हिस्सा लेना पड़ा। हालांकि अपने छात्रजीवन काल के बाद उन्होंने यह माना कि 'शैक्षिक कार्यक्रम में बौद्धिक विकास की ही तरह शारीरिक विकास के लिए खेलों को बराबर रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।' हालांकि गांधीजी का क्रिकेट पर प्रभाव बंबई में तब के प्रसिद्ध टूर्नमेंट बॉम्बे पेन्टैंगुलर पर दी गई राय से दिखता है। दिसंबर 1940 में गांधी जी वर्धा के दौरे पर थे, तब यहां गाधीजी हिंदू जिमखाना के एक खास प्रतिनिधिमंडल से मिले थे। इस प्रतिनिधिमंडल से गांधी जी ने कहा था कि बॉम्बे में 14 तारीख को आयोजित होने वाले पेन्टैंगुलर मैच पर मेरी राय क्या है। मुझे जानकारी मिली है कि इस मैच को रोकने के लिए आंदोलन चल रहे हैं। मुझे लगता है कि इस मैच के खिलाफ इसलिए आंदोलन हो रहे हैं क्योंकि इन दिनों सत्याग्रहियों को गिरफ्तार और कैद किया जा रहा है। खासतौर से कुछ बड़े नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया है। महात्मा गांधी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'इन दिनों जब युद्ध के कारण (दूसरा विश्व युद्ध) शोक का माहौल है, यूरोप में स्थिरता और उनकी सभ्यता पर खतरा है मंडरा रहा है, जिसकी चपेट में एशिया भी है.... इन सब बातों का ख्याल करके मैं इस मैच के विरोध में हो रहे आंदोलन को ही सपॉर्ट करूंगा।' साम्प्रदायिक संगठनों के इस टूर्नमेंट पर जब गांधी ने अपना वक्तव्य देकर इसकी निंदा की, तो तत्कालीन प्रेस न इसका प्रमुखता से प्रकाशन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 7 दिसंबर 1940 को प्रकाशित अपने अंक में इस खबर को प्रमुखता से पहले पन्ने पर लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे शीर्षक दिया, 'मिस्टर गांधी अगेन्स्ट पेन्टैंगुलर' यानी पंचकोणीय सीरीज के खिलाफ हैं गांधी।' गांधीजी ने अपना यह स्टेटमेंट तब दिया था, जब कुछ ही दिन बाद बंबई का यह चर्चित वार्षिक क्रिकेट टूर्नमेंट शुरू होने वाला था। इन दिनों पेन्टैंगुलर टूर्नमेंट का रोमांच चरम पर था। बंबई के लोग इस टूर्नमेंट से पहले आयोजित होने वाले ट्रायल मैचों को भी देखने के लिए बड़ी तादात में पहुंच रहे थे। हिंदू जिमखाना ने जब इस टूर्नमेंट से अपना नाम वापस लेने का प्रस्ताव रखा, तो इस प्रस्ताव को जिमखाना के सिर्फ 70 सदस्यों का समर्थन मिला था, जबकि उस वक्त जिमखाना के 900 से ज्यादा सदस्य होते थे। हालांकि बाद में यह प्रस्ताव गांधीजी के सम्मान के तौर पर (280-243) 37 वोटों के मामूली अंतर से पास हो गया।


from Cricket News in Hindi, Cricket Updates, Live Scorecard, Schedules, Results, Teams and Points Table – Navbharat Times https://ift.tt/2mJR4E1

No comments