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फुटबॉल प्लेयर्स जितने फिट हों क्रिकेटर: विराट

मार्गस मर्गुलाओ, पणजी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान अगर एक क्रिकेटर न होते तो संभवत: वह फुटबॉल खेल रहे होते। फिटनेस के प्रति भारतीय कप्तान के समपर्ण ने अन्य खिलाड़ियों के लिए भी फिटनेस के मानकों को कड़ा बना दिया है और फुटबॉल के प्रति उनकी दीवानगी भी किसी भी छिपी नहीं है। इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब में एफसी गोवा की नई जर्सी के लॉन्च के मौके पर इस फुटबॉल टीम के सह-मालिक विराट कोहली गोवा में थे। इस मौके पर विराट कोहली ने हमारे सहयोगी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से फुटबॉल, फिटनेस और भारत में खेलों पर खास चर्चा की। पेश है इस चर्चा के खास अंश... क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद क्या आप खुद को फुटबॉल से ज्यादा जुड़ा हुआ पाएंगे?अभी अपने फाउंडेशन (विराट कोहली फाउंडेशन) के साथ मिलकर जो मैं कर रहा हूं वह है ऐथलीट डिवेलपमेंट प्रोग्राम। इसके तहत जो अकैडमी और स्ट्रक्चर तैयार करने का हम प्रयास कर रहे हैं वह भविष्य में एफसी गोवा की योजनाओं का भी बड़ा हिस्सा होगा। हम चाहते हैं कि हम ऐसे खिलाड़ी विकसित करें, जो एफसी गोवा के लिए खेलें और फिर वे राष्ट्रीय टीम का भी प्रतिनिधित्व करें। ये ऐसी चीज हैं, जो मुझे रोमांचित करती हैं और इस प्रकार की चीजों में मैं अपनी ऊर्जा लगाना चाहता हूं। मैं बस केवल स्टेडियम में नहीं दिखना चाहता लेकिन मैं चाहता हूं कि जमीनीस्तर पर मैं दिखूं, जहां से मैं खिलाड़ियों पर प्रभाव छोड़ सकूं। अगर एक सही सिस्टम कहीं पर काम करता है तो फिर कोई भी खेल अच्छे स्वरूप में आता ही है। मेरी रिटायरमेंट के बाद ये ऐसी चीजें हैं, जो मेरी प्राथमिकताओं में शुमार होंगी। अब मैं एफसी गोवा से जुड़ा हूं तो फुटबॉल पर मेरा ध्यान जाएगा ही लेकिन सामान्य रूप से मैं अन्य खेलों के लिए ऐसा योगदान देना चाहता हूं, जिससे जमीनी स्तर पर लोगों को लाभ मिल सके। क्या क्रिकेटरों को भी फुटबॉलरों से कुछ सीखने की जरूरत है?हम फुटबॉलर्स हमेशा उनके कड़े अनुशासन के लिए देखते हैं। यह इस खेल की जरूरत है, जहां फील्ड पर उतरने के बाद अपना श्रेष्ठ देने के लिए आपको इस स्तर पर होना ही पड़ेगा। फुटबॉल खिलाड़ी अपने प्रफेशनल, शारीरिक तैयारियों, पोषण और बाकी के समय के लिए बहुत अनुशासित रहते हैं। हम उनसे काफी कुछ सीखते हैं। अपनी फिटनेस से आप पहले ही क्रिकेटर्स के लिए नए बेंचमार्क (मानक) स्थापित कर चुके हैं। फुटबॉलर्स के साथ फिटनेस के स्तर को आप कैसे देखते हैं?आप इसकी तुलना कर ही नहीं सकते। मैं मानता हूं कि इनके साथ अगर किसी की तुलना की जा सकती है, तो वे फास्ट बोलर होंगे। क्रिकेट ऐसा खेल नहीं है, जहां हैरतअंगेज रूप से शारीरिक ताकत की जरूरत हो। फुटबॉल बहुत तेज खेल है, जो 90 मिनट के भीतर पूरा हो जाता है। इसके लिए आपको खेल की स्थितियों पर अपना नियंत्रण रखने के लिए बिल्कुल फिट रहना होता है। क्रिकेट में फिटनेस की इस स्तर (फुटबॉल जितनी) पर जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर आप खुद को फुटबॉलर्स जितना फिट रखना चाहते हैं, तो आप क्रिकेट में कई चीजों को अलग स्तर पर जाकर संभव बना सकते हैं। क्रिकेटर्स की तुलना में फुटबॉलर्स कहीं ज्यादा फिट होते हैं। पढ़ें: फुटबॉल को लेकर आपने कई बार बताया है कि आप क्रिस्टियानो रोनाल्डो और रोनाल्डो के जबरदस्त फैन हैं। वे 'अद्भुत हैं।' अगर आपको मौका मिले, तो आप किसे चुनेंगे? मुश्किल सवाल। लेकिन मैं कहूंगा कि जिन्हें मैंने देखा है उनमें क्रिस्टियानो सबसे ज्यादा पूर्ण खिलाड़ी नजर आते हैं। चाहे उनके लेफ्ट पैर की बात हो या फिर राइट पैर की। उनकी स्पीड की बात हो या फिर उनकी ड्रिबलिंग की प्रतिभा की। वह हैरतअंगेज हैं। मैंने उनसे बेहतर गोल करने वाला खिलाड़ी नहीं देखा। दूसरी ओर रोनाल्डो की बात करें तो वह अलग हैं। उन्होंने इस खेल में नई क्रांति लाई और हर किसी ने उन्हें फॉलो किया। उनका एक खास स्थान है, लेकिन अगर मुझे दोनों में किसी एक को ही लेना है, जो मेरी टीम को ऊर्जा और मजबूती दे, वे क्रिस्टियानो ही हैं। क्या आप उन्हें मेसी पर भी वरीयता देंगे? यह पर्सनल चॉइस है। मेसी फुर्तीले खिलाड़ी हैं, उनमें स्वभाविक टैलंट है और उनकी क्षमता किसी से भी पीछे नहीं है। मेरे लिए जो चीज मायने रखती है वह है खेल के प्रति मिनट अपनी क्षमताओं को भरपूर प्रयोग। इसके लिए रोनाल्डो खुद को दूसरों से अलग करते दिखते हैं। टॉप लेवल पर खेलने वाले सभी खिलाड़ी प्रतिभाशाली होते हैं लेकिन मैं नहीं मानता कि जिस इच्छा के साथ वह खेलते हैं कोई दूसरा खिलाड़ी भी उनकी जैसी इच्छा से खेलता है।


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